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पीढ़िया
माँ की गंध
सूत्र
हिमपात
हुजूम

संकलन में-
गुच्छे भर अमलतास-
हवाई

  सूत्र

आज वह सूत्र फिर से बँध गया
जो टूट गया था बरसों से
क्यों नदी की धार
अचानक गायब हो कर
फिर से नदी बन जाती है
मेरा ममत्व मुझसे टूट कर
आ जुड़ा है इस नए प्रवाह में

अब जहाँ जहाँ यह नदी बहेगी
मेरा भाव अनंत हो जाएगा
जो धारा मुझसे टूटी थी
वह कई कई धाराओं में फूटकर
मुझे कितने ही सूत्रों से जुड़ेगी
फैलेगी

 

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