अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में आकुल की रचनाएँ-

नयी कुंडलियों में-
वर दो ऐसा शारदे

कुंडलिया में-
सर्दी का मौसम
साक्षरता

संकलन में-
मेरा भारत- भारत मेरा महान
नया साल- आया फिर नव वर्ष
देश हमारा- उन्नत भाल हिमालय

नीम- नवल बधाई
दीप धरो- उत्सव गीत
होली है-
होली रंगों से बोली

 

 

वर दो ऐसा

(१)

वर दो ऐसा, शारदे, नमन करूँ ले आस।
हटे तिमिर अज्ञान का, और बढ़े विश्वास।।
और बढ़े विश्वास, ज्ञान की गंगा आये।
बहे सरस साहित्य, सभी का मन महकाये।
कह ‘आकुल‘ कविराय, मधुमयी रसना कर दो।
वैर द्वेष, हों खत्म, शारदे ऐसा वर दो।।

(२)

हिन्दी के उन्नयन को, बने राय मिल बैठ।
गाँव गाँव अभियान हो, और बनाये पैठ।।
और बनाये पैठ, सोच सबकी बदलेगी।
हिन्दी को भी एक, प्रभावी दिशा मिलेगी।
कह ‘आकुल‘ कविराय, आज है पिछड़ी हिन्दी।
निश्चय ही सिरमौर, बनेगी, अपनी हिन्दी।।
 

(३)

बच्चे, बूढ़े, नारि, नर, पायें अक्षरज्ञान।
क्या समझें संसार को, जो अपनढ़ नादान।।
जो अनपढ़ नादान, कूप मंडूक कहाते।
शिक्षा पाकर लोग, बड़े ज्ञानी बन जाते।
कह ‘आकुल‘ कविराय, अशिक्षित खायें गच्चे।
पाएँ अक्षरज्ञान, नारि, नर, बूढ़े, बच्चे।।

(४)

माँ की आँखों से बहे, गंगा जमुना नीर।
माँ को कष्ट कभी न दें, फूटे कभी न पीर।।
फूटे कभी न पीर, हाल हर देवें खुशियाँ।
लें माँ का आशीष, भरें इससे अंजुरियाँ।
कह ‘आकुल‘ कविराय, उठा ले बला जहाँ की।
फिर भी करे न हाय, महत्ता ऐसी माँ की।।

(५)

वृक्षारोपण हो सखे, जगह जगह हों पेड़।
जीवन है पर्यावरण, मीत न इसको छेड़।।
मीत न इसको छेड़, प्रदूषण मुक्त करायें।
पथ, पगडंडी, ग्राम, नगर में पेड़ लगायें।
कह ‘आकुल‘ कविराय, न हो वृक्षों का शोषण।
वन, उपवन की शान, करें हम वृक्षारोपण।।

४ अगस्त २०१४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter