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अनुभूति में मनोहर विजय की रचनाएँ-

अंजुमन में-
असूलों से बगावत
जब फकीरों पे ध्यान
दहशत की मंजिल
नाम दिल पर
फिर वही दर्द

 

फिर वही दर्द

फिर वही दर्द का आईना पढ़ लिया
दोस्तों ने मेरा चेहरा पढ़ लिया

हो गई दिल से लग़ज़िश वही आज फिर
लफ्ज था बेवफ़ा बावफ़ा पढ़ लिया

मंज़िलों का पता वो बताते न क्यों
रास्तों ने मेरा हौसला पढ़ लिया

तू बँधाता रहा हौसला बस मेरा
और मैने तेरा फ़ैसला पढ़ लिया

रोज होती है ऐसी कहानी ‘विजय’
आज क्या सुर्खि़यों में नया पढ़ लिया

३० फरवरी २०१२

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