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देखो इस तरह भी

गहरी नीद से मीठे सपनों के साथ
उठो सुबह सवेरे
और अचानक एक दिन
तुम्हारा धुँधलाया चश्मा
हाथों से छूट
टूट जाये
व्यर्थ होता दिखे
सपनों के सुनहरे परदों का रंग

जरा झुको
काँच की किरचों से
नाजुक उँगलियों को बचाकर
उठा लो उन्हें और
जोड़ कर देखो
जीवन का अनदेखा
बेरंग सा रंग और
सीत्कार के संग
चखो रक्त बिन्दुओं का खारापन
शायद वह भी बेस्वाद हो जीवन की तरह

२० अगस्त २०१२

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