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घड़ी

घड़ी बंद है
लगता है जैसे काँटे
अब कोई नियम नहीं मान रहे
जिद्दी बच्चे की तरह
कौन आगे जायेगा
यही है लड़ाई
जाओ जाकर कहो !
समय कोई बच्चों का खेल नहीं
हर शताब्दी के अंत में
उसे हाजरी देनी ही पड़ती है

२० अगस्त २०१२

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