अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में रवींद्र स्वप्निल प्रजापति
की रचनाएँ-

नई रचनाएँ-
ओ मेरे शरीर
कुछ दिन और मैं
झील- तीन कविताएँ
मैं इश्क का दिन हुआ
सफर

छंद मुक्त में-
आज़ादी
आसमाँ
एक दृश्य
कीमत
कोई आशा
तू रौशनी की तरह
दिल की दुनिया
दोस्ती
पाँच छोटी कविताएँ
मेरी नसों में बह रहा है शहर
मैंने तुम्हें
यों हमने प्यार किया
समय की चादर

 

आज़ादी

सबसे कठिन है आज़ाद होने की घोषणा करना
आज़ाद हो जाना आदमी की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है
आज़ादी माँगना सबसे बड़े भय का सामना करना है
जब हवाएँ सबको एक तरफ़ बहा ले जा रही हो

लोग प्रयत्नों के तिनके छोड़ कर
अपने खाली हाथों को लहराने लगें
तब कठिन हो जाता है आज़ादी की पलांध बताना
जब गुलामी को आज़ादी का नाम दिया जा चुका हो
ज़रूरत होती है आज़ादी को पहचानना

अपनी आज़ादी की घोषणा
दुनिया की सबसे बड़ी कीमत चुकाने की शुरुआत है
ये शुरुआत किसी भी क्षण की जा सकती है

१६ मई २००६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter