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मेरी नसों में बह रहा है शहर
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मेरी नसों में बह रहा है शहर

मेरी नसों में बह रहा है शहर
लाल रंग का शेड लिए हुए शाम का परदा
दुनिया का हर शहर उसी पर चमक रहा है
जैसै दुनिया का सबसे बड़ा परदा है लाल
और सब कुछ संरक्षित किए जाने के लिए
मेरे रक्त में डूबी है धरती

धरती लाखों घटनाओं की शृंखला है
जो मेरे रक्त में अनंत अणुओं की तरह बहती
समय के नए आयाम की ओर जाती हुई

मेरे शरीर में हज़ारों बरसों का प्रकाश घुला है
जिसमें धरती चमक रही है
मेरा शहर भी चमक रहा है

१६ मई २००६

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