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भोली सी चाहत

 

भोली सी चाहत

तय होती है तमाम राहें
हिम्मत से, हौसलों से
ऐसा जानती थी मै
अपने भोलेपन में
हर सफल आदमी को
बहुत मेहनती मानती थी मै
अच्छा होता
की यह भ्रम बना रहता
सफेदपोशों का चेहरा
छुपा रहता
कम से कम
उनमे शामिल होने की
चाहत बनी रहती
इस बंदरबाट के बीच भी
शायद,
एक दिन
मै सफल हो जाऊँ
काश
मेरी भोली सी
चाहत बनी रहती

१३ जून २०११

 

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