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भोली सी चाहत

  नियति

हर बार तुम्हें चुन लेती है
नियति भी, नियोक्ता भी
युद्ध को खत्म करने की कीमत
तुम्हारी पीढियों ने चुकाई है
और अभी पूरी तरह से
उबरी भी नहीं थीं उनकी संतानें
कि नियति ने
फिर से चुन लिया तुम्हें
प्राकृतिक आपदा के रुप में
विकिरण के खतरों को
गले लगाने के लिए
जब नियति
बड़ी हो जाती है
चुने हुए फैसलों से
तब हार जाता है मनुष्य
अपने सारे
संसाधनों से लैस
होने के बावजूद।

२८ नवंबर २०११

 

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