अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में श्रद्धा यादव की रचनाएँ

ई रचनाओं में-
नियति
मुर्दाघर
यातना गृह- १
यातना गृह- २

छंदमुक्त में-
एम्मा के नाम पाती
नन्हीं सी चिड़िया
भय है
भोली सी चाहत

 

यातना गृह -१
 
जो भी मै कहना चाहती हूँ
उसमे कुछ भी नया नहीं
सब पुराना है
मेरा मकसद तो
बस ये याद दिलाना है
आततायी नहीं मरते
न मरती हैं यातनाएँ
परावर्तित नहीं होती
उनकी आत्माएँ।
इतिहास रचता है
विजेता आपने अनुरूप
हो चाहे वह कैसा भी
होती है उसकी सर्वत्र पूजा ही।
सत्य कही पीछे रह जाता है,
शक्ति और अहं जब टकराता है।
साक्षी इतिहास में
गर जर्मनी की हार न होती,
तो हिटलर मिथक बन जाता
सुशाशन और सुव्यवस्था का
और न खुलते यातना गृह
गैस चेम्बरों के ...

२८ नवंबर २०११

 

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter