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  तीन छोटी कविताएँ

बस चल रही है

सब तरफ घपले-घोटाले,
टेलीफोन से लेकर
चारे तक हर आइटम खाले,
गरीबों की भैंस पानी में
अमीरों की दाल गल रही है,
सरकारें चलती नहीं
बस चल रही है!

राजनीति

त्याग नहीं
सुविधा है
मूर्ख बनाने की
विधा है।

चिकने घड़े

गरीबों के घड़े
सूखे पड़े हैं,
हम उन्हें मितव्ययी
बनाने पर अड़े हैं,
कौन पचड़े में पड़े
नेता सारे
चिकने घड़े हैं।

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है