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साइज़

  साइज़

हीरोइन का पारा चढ़ा,
जूतेवाला घबराकर
कोने में खड़ा,
मॅडम को जूता
चाहिए था,
बाहर से छोटा
अन्दर से बड़ा।

औरतें

खुद शराब हैं
मगर पीने से
डरती है
मुहब्बत में
मर जायें
सौ-सौ बार
मगर बुड्ढी होकर
जीने से डरती है।

 

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है