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रोज़ सैंकड़ों लाशों के
पंचनामे,
भूख व्याकुल करे
या दंगों में गरीब मरे,
किस्मत में मरना ही
लिखा है तो
बेचारी सरकार क्या करे,
ये उपाय तो
जनसंख्या नियंत्रण के
तौर है
सचमुच हमारे देश में
विकास का दौर है।

 

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है