पत्र व्यवहार का पता

अभिव्यक्ति तुक-कोश

१. ८. २०१८

अंजुमन । उपहार । काव्य संगम । गीत । गौरव ग्राम । गौरवग्रंथ । दोहे । पुराने अंक । संकलन । अभिव्यक्ति
कुण्डलिया । हाइकु । अभिव्यक्ति । हास्य व्यंग्य । क्षणिकाएँ । दिशांतर । नवगीत की पाठशाला । रचनाकारों से

अशोक

 

 

तरु अशोक का जिसमें लगते
लाल सुनहरी फूल
वहाँ शोक का काम न कोई
हर सुख का है मूल

ताँबे जैसी नई कोंपलें
जीवन में उल्लास भरें
आम सरीखी हरी पत्तियाँ
तन मन का हर ताप हरें
जिसके नीचे बैठ जानकी
दुख जाती थी भूल

हर घर के दरवाजे पर कुछ
नव अशोक के विटप बड़े
आसमान छूने की जिद है
धरती पर हैं मगर खड़े
द्वारपाल बन रोक रहे हैं
घर में घुसे न धूल

जाने कितने औषधीय गुण
रखे हुए अपने अन्दर
हर मौसम में हरियाली की
रहता है ओढ़े चूनर
विटप अशोका होता अदभुत
कर लो सभी कबूल

- बसंत कुमार शर्मा

इस माह
अशोक विशेषांक में

गीतों में-

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अनिल कुमार वर्मा

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ऋताशेखर मधु

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ओमप्रकाश नौटियाल

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कल्पना मनोरमा

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गीता पंडित

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गोपाल कृष्ण आकुल

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पंकज परिमल

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बसंत कुमार शर्मा

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भावना तिवारी

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मधु प्रधान

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मधु शुक्ला

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शशि पाधा

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शशि पुरवार

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श्रीधर आचार्य शील

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शैलेष गुप्त वीर

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सुनीता सिंह

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सुरेन्द्रपाल वैद्य

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छंदमुक्त में-

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परमेश्वर फुँकवाल

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मधु संधु

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सरस्वती माथुर

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सुरेन्द्रनाथ कपूर

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छंदों में-

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ज्योतिर्मयी पंत

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सुबोध श्रीवास्तव

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अंजुमन में-

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कल्पना रामानी

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रमा प्रवीर वर्मा

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सुरेन्द्रपाल वैद्य

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कल्पना रामानी