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अनुभूति में चंद्रभान भारद्वाज की रचनाएँ -

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कोई नहीं दिखता
गगन का क्या करें
जब कहीं दिलबर नहीं होता
नाज है तो है
मान बैठे है

अंजुमन में-
अधर में हैं हज़ारों प्रश्न
आदमी की सिर्फ इतनी
उतर कर चाँद
कदम भटके
कागज पर भाईचारे
गहन गंभीर
तालाब में दादुर
दुखों की भीड़ में
पीर अपनी लिखी
रात दिन डरती हुई-सी

रूप को शृंगार
सत्य की ख़ातिर
सिमट कर आज बाहों में

संकलन में- होली पर

  नाज है तो है

हमारे प्यार पर हमको अगर कुछ नाज है तो है
हमारी भी निगाहों में कोई मुमताज है तो है

जमाने के लिए राजा रहे हम अपनी मरजी के
हमारे दिल पे पर इक नाजनी का राज है तो है

दिया बन कर जले दिन रात उसकी मूर्ति के आगे
हमारे प्यार में इक सूफ़िया अंदाज है तो है

हमारा प्यार उठती हाट का सौदा नहीं कोई
बँधे अनुबंध में दुनिया भले नाराज है तो है

खुली है जिंदगी अपनी कहीं परदा नहीं कोई
अँगूठी में जड़ा उसका दिया पुखराज है तो है

हमारे प्यार का आधार बालू का घरोंदा था
हमारी आँख में वह आज तक भी ताज है तो है

उमर इक खूबसूरत मोड़ पर दिल छोड़ आई थी
दिशाओं में उसी की गूँजती आवाज है तो है

फुदकती ही रही हरदम हमारे प्यार की बुलबुल
अगर दुनिया का हर सैयाद तीरंदाज है तो है

न तो समझा रदीफों को न समझे काफ़िए हमने
ग़ज़ल में पर हमारा नाम 'भारद्वाज' है तो है


३१ अक्तूबर २०११

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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