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कौन करता याद
कौन देता है कौन पाता है
गर हिम्मत हो
गीत तेरे

जड़ जिसने थी काटी
जहाँ उम्मीद हो ना मरहम की

जिस पे तेरी नज़र
झूठ को सच बनाइए साहब
तल्खियाँ दिल में
तेरे आने की ख़बर
तोड़ना इस देश को
दिल का दरवाज़ा
दिल का मेरे
दिल के रिश्ते
नीम के फूल
पहले मन में तोल
फूल ही फूल

फूल उनके हाथ में जँचते नहीं
बात सचमुच
भला करता है जो
मान लूँ मैं
मिलने का भरोसा
याद आए तो
याद की बरसातों में
याद भी आते क्यों हो
ये राह मुहब्बत की
लोग हसरत से हाथ मलते हैं

वो ही काशी है वो ही मक्का है
साल दर साल

`

फिर परिंदा चला

फिर परिंदा चला उड़ान पे है
तीर हर शख्स की कमान पे है

फ़स्ल की अब खुदा ही खैर करे
पासबाँ आजकल मचान पे है

तब बदलना नहीं ग़लत उसको
जब लगे रहनुमां थकान पे है

हैं निगाहें बुलन्दियों पे मेरी,
क्या हुआ पाँव गर ढलान पे है

धार शमशीर पर करो अपनी
ज़ुल्म का दौर फिर उठान पे है

शहर के घर में यूं तो सब कुछ है’
पर सुकूँ, गाँव के मकान पे है

बात “नीरज” तेरी सुनेंगे सभी
जब तलक चाशनी ज़बान पे है

१९ सितंबर २०११

 


 

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