अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 

अनुभूति में प्राण शर्मा की रचनाएँ

नई रचनाएँ—
कितनी हैरानी

घर पहुँचने का रास्ता
छिटकती है चाँदनी

अंजुमन में—
उड़ते हैं हज़ारों आकाश में
गुनगुनी सी धूप
चेहरों पर हों
मुँडेरों पर बैठे कौओं
सुराही
हर एक को

  उड़ते हैं हज़ारों आकाश में

उड़ते हैं हज़ारो आकाश में पंछी
ऊंची नहीं होती परवाज़ें सभी की

इस शहर का जीवन सहमा तो भला क्यों
आतंक की आँधी उस शहर चली थी

इक डूबता बच्चा कैसे वो बचाता
उस शख्स में यारों हिम्मत की कमी थी

बरसी तो यूँ बरसी आँगन भी न भीगा
सावन की घटा थी खुलके तो बरसती

धर्मों में बटा है संसार ये माना
बँट पाई न लेकिन पीड़ाएँ न जहां की

पुरज़ोर हवा में गिरना ही था उनको
ए 'प्राण' घरों की दीवारें थी कच्ची

४ सितंबर २००३

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।