पत्र व्यवहार का पता

अभिव्यक्ति तुक-कोश 

१. ९. २०२६1

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कुण्डलिया हाइकु अभिव्यक्ति हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर नवगीत की पाठशाला रचनाकारों से

कहो माधव

  युग युगों के बाद मिलना हो रहा है
कहो माधव किस तरह से कट रहे हैं दिन तुम्हारे
सुध हमारी भी कभी लो, भक्त हम भी हैं तुम्हारे

बन गए योगेश्वर तुम
पर हमारे क्षेम में तत्पर तो हो न?
सुदर्शन धारा है तुमने
पर सुरीली बाँसुरी भी साथ है न
क्या अभी भी भूख है माखन सुहाता है
गोपियों का साथ भी क्या याद आता है

बरस बीते आज मिलना हो रहा है
कहो माधव, साथ में अब कौन रहते हैं तुम्हारे

सारथी अर्जुन के हो तुम
रथ हमारा भी सुपथ पर ले चलोगे क्या
प्रजापति तो हो जगत के
मगर ब्रज की प्रजा के सँग कभी होगे क्या
क्या अभी भी युद्ध में चुपचाप रहते हो
और सौ अपशब्द भी हँसकर के सहते हो

उस प्रलय के बाद मिलना हो रहा है
कहो-माधव, याद में अब कौन रहते हैं तुम्हारे

- पूर्णिमा वर्मन

इस माह
जन्माष्टमी विशेषांक में

गीतों में-

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अनिता सुधीर आख्या

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अशोक अज्ञानी

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आकुल

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उदय शंकर सिंह 'उदय'

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कुमार गौरव अजीतेन्दु

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जिज्ञासा सिंह

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मधु प्रधान

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पूर्णिमा वर्मन

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रंजना गुप्ता

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रघुवीर शर्मा

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रमेश गौतम

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वंदना नामदेव

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विष्णु शास्त्री सरल

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विश्वंभर शुक्ल

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शशि पाधा

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श्रीधर आचार्य शील

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संजय सुजय बासल

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सुरेन्द्र कुमार शर्मा

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सुशील अरजरिया मधुर

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सुशील शर्मा

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सौरभ पाण्डेय

छंदों में-

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अशोक रक्ताले फणीन्द्र

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ओमप्रकाश नौटियाल

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ज्योतिर्मयी पंत

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मंजुलता श्रीवास्तव

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रश्मि कुलश्रेष्ठ

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लक्ष्मीनारायण गुप्त

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सुधा हलूवालिया

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सुनीता सोलंकी मीना

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सुबोध श्रीवास्तव

अंजुमन में-

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अविनाश ब्यौहार

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आनंद क्रांतिवर्धन

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परमजीत कौर रीत

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प्रगति शंकर

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बसंत शर्मा

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रमा प्रवीर वर्मा

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विजय चंद्र त्रिपाठी

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सुरेन्द्र पाल वैद्य

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प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
-|- सहयोग : दीपिका जोशी
   
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