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गीतों में
गीत

अंजुमन में—
अपनी कथा
आदतें उसकी
उड़ते हैं हज़ारों आकाश में
क्यों न महके
कर के अहसान
कितनी हैरानी
कुछ ऐसा प्यारा सा जादू
खुशी अपनी करे साझी
गुनगुनी सी धूप
घर पहुँचने का रास्ता

चेहरों पर हों
छिटकती है चाँदनी
ज़ुल्मों का मारा भी है
ताना बाना
तितलियाँ
तुमसे दिल में
धूम मचाते
नाम उसका
नफरत का भूत
नित नई नाराज़गी
पंछी

फुरसतों के शहर में
बेवजह ही यातना
मन किसी का दर्द से
मुझसे मेरे जनाब
मुँडेरों पर बैठे कौओं
सुराही
हम कहाँ उनको याद आते हैं
हर एक को
हर किसी के घर का

हर लफ्ज़ कहानी है
हाथीघोड़ा बन कर

संकलन में प्यारी प्यारी होली में

 

बात पूछो

बात पूछो, सवाल करते हैं
लोग भी क्या कमाल करते हैं

हर किसी को निहाल करते हैं
नेक बन्दे कमाल करते हैं

जो बुजुर्गों की कुछ नहीं सुनते
अपना जीना मुहाल करते हैं

नाम यूँ ही कभी नहीं होता
पैदा कोई मिसाल करते हैं

किस को अपना कहूँ, यहाँ सब ही
अपनाअपना ख़याल करते हैं

वो जो अपनों की भी नहीं सुनते
अपना जीना मुहाल करते हैं

१७ नवंबर २०१४

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