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  फ़र्ज़ तुम्हारा

मेरे वतन के नौजवानों,
अपनी ताकत को तुम पहचानो।
मातृभूमि का तुम पर है क़र्ज़
वतन के प्रति तुम्हारा है कुछ फ़र्ज़।
आगे बढ़ो, तुम कुछ कर दिखलाओ,
गर्व से मस्तक देश का ऊंचा उठाओ।
बेकारी, बेरोज़गारी की ये बातें हैं बेकार,
मेहनत से हो जाते है, सब सपने साकार।
नहीं है काम कोई छोटा,
मेहनत से है सब-कुछ होता।
यों ही हाथ पे हाथ मत धरे रह जाओ,
देश के लिए तुम कुछ कर जाओ।
मत होने दो अपना ये जीवन बेकार,
ये धरती रही तुम्हें पुकार।

24 सितंबर 2005

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