अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 


अनुभूति में अमित कुमार सिंह की रचनाएँ—

नई कविताएँ-
ट्रैफ़िक जाम
चेहरे पर चेहरा
ज़िंदगी ऐसे जियो
धूम्रपान - एक कठिन काम
नारी समानता - एक परिवर्तन
नेता और नरक का द्वार
प्रकृति-प्रदूषण-कलाकार
भूत

हास्य व्यंग्य में-
इंतज़ार
कौन महान

कविताओं में-
अंधकार
कौन है बूढ़ा
दीप प्रकाश‌
नव वर्ष का संदेश
नादान मनुष्य
परदेशी सवेरा
फ़र्ज़ तुम्हारा
भूख
मशहूर
माँ
माटी की गंध‌
मेरे देश के नौजवानों
यमराज का इस्तीफ़ा
रोज़‌ हमेशा खुश रहो
विवाह

  मां

दुनिया का सबसे
प्यारा शब्द
जिसे सुनकर
सिर श्रद्धा से झुक
जाता है,
जिसकी मिठास
मिश्री से भी मीठी है
जिसकी गहराई
समुंदर की तरह,
जो धरती जैसा,
विशाल हृदय रखती है,
जिसकी नहीं है
दुनिया में कोई मिसाल
'मां' तू है बेमिसाल।
धरती पर हमें चलना।
सिखलाती
ज़िंदगी से लड़ना
बतलाती,
खुद विष पीकर
अमृत बांटने वाली
मां तुम शक्ति पुंज हो
ममता का अनूठा
कुंज हो।
25 जून
2006

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।