अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में डॉ. सुरेन्द्र भूटानी की रचनाएँ

नई रचनाएँ-
अर्ज़
इंतज़ार
दिल इक तन्हा मुसाफ़िर
भ्रमग्रस्त जीव
यादों की अँधेरी बंद गुफ़ाएँ
विवशता
सीढ़ियाँ जहाँ ख़त्म होती हैं

नज़्मों में-
अनोखे तूफ़ान
आत्मविरोध
इब्तिदा
एक ज़िन्दगी तीन किरदार
एक हिस्सेदार से
खेल
ग़फलत
गीत
नई दोस्ती
नया संसार
नाकामयाबी
दोस्त से
प्रतिक्रिया
बारह रुबाइयाँ
बेबसी
विरोध
शख्सियत

  आत्मविरोध

यह सारा ब्रह्मांड मेरा है
आकाश से उतर कर
इस महाद्वीप पर आया हूँ
महाद्वीप की विभक्ति हुई
तो इस देश का बलिहारी बना
भूमिपुत्र होकर
इस प्रांत से भी आ जुड़ा
और चलता हुआ कहलाया
इस नगर का एक सभ्य नागरिक
ताकि रह सकूँ किसी गली के
नुक्कड़ वाले मकान में
परिवार आ जुड़ा
तो सिमट कर बैठ गया एक कमरे में
मेरी विशालता कहाँ से कहाँ आ गई
किंतु खोजी मन कहीं और भटक गया
एकांत मन अचानक
हाथ में माचिस लिए
किसी सिगरेट को ढूँढ़ता है
और सहसा विचार उपजता है
सिगरेट जलाने से पहले
इस माचिस की तीली के साथ
यह सारा घर भी जलाया जा सकता है
और मेरा ब्रह्मांड भी अपने आप जल सकता है

किंतु मैं राख होकर फिर कहाँ जाऊँगा
तालाब नदी या अथाह समुद्र
इस नीले आकाश के नीचे
हाथ बाँधे परिक्रमा कर रहे हैं
मुझे पाने की या मुझमें समाने की
मैं दुविधा में मग्न
मेरी धरती मेरा गगन
क्या निर्णय दू
या
क्या निर्णय लूँ

९ जून २००६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter