अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में डॉ. सुरेन्द्र भूटानी की रचनाएँ

नई रचनाएँ-
अर्ज़
इंतज़ार
दिल इक तन्हा मुसाफ़िर
भ्रमग्रस्त जीव
यादों की अँधेरी बंद गुफ़ाएँ
विवशता
सीढ़ियाँ जहाँ ख़त्म होती हैं

नज़्मों में-
अनोखे तूफ़ान
आत्मविरोध
इब्तिदा
एक ज़िन्दगी तीन किरदार
एक हिस्सेदार से
खेल
ग़फलत
गीत
नई दोस्ती
नया संसार
नाकामयाबी
दोस्त से
प्रतिक्रिया
बारह रुबाइयाँ
बेबसी
विरोध
शख्सियत

  सीढ़ियाँ जहाँ ख़त्म होती है

सीढ़ियाँ जहाँ ख़त्म होती है
वहाँ अंधेरा ही अंधेरा है
रौशनी के लिए मैं कौन-सा दरवाज़ा खटखटाऊँ?
छत से उतर आया,
के गली में कभी किसी से सामना हो जाए
चंद कदम चल के देखा तो गली बंद हो गई
लौट कर फिर घर की ओर मुड़ा
फिर अंधेरे में खुद को टटोलने लगा
फिर सीढ़ियाँ चढ़ने का इरादा होने लगा
लेकिन इस बार सीढ़ियाँ बहुत ऊँची थीं
छत बहुत दूर हो गई थी इस बीच
दिल के अंदर अंधेरा बड़ी गहराई से डूब चुका था
नाकाम होकर पहली सीढ़ी पे थम गया
और महवे-इंतज़ार हो गया
शफ़क के लिए
कब आए कब आए वो
मुझे अंदर से फरोजाँ करने के लिए
मेरी बेपनाह बेकली दूर करने के लिए

३१ अगस्त २००९


इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter