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जंग ख़त्म हो गई है
बाप की लाश किसी महाज़ पे दफ़ना दी गई होगी

माँ का घर टूटा फूटा है
इक बम यहाँ पर पड़ा था

मदरसे में अब लोग अम्न के बारे बताएँगे
तारीख़ तो अम्न के ज़माने में बताई जाती है

वैसे तो बंदूक, तोप, टैंक, जहाज़, राकेट
तारीख़ बनाते हैं
मगर ऐसी तालीम से क्या हासिल?
क्यों न मैं साज़ लेकर

इक नई दुनिया बनाने निकलूँ
क्यों न मैं नए नगम़ात लेकर
इक नई तारीख़ सजाने निकलूँ
तुम भी आओ साथ मेरे
अपने बालों में गुलाब सजाए हुए
हम तुम इक दौगाना गाएँ

वही अपने बचपन का,
प्यार हुआ, इकरार हुआ
ये इक नया संसार हुआ

२४ मार्च २००६

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